नींव ७

मत्ती रचित सुसमाचार, भाग ३

येरूशलेम में प्रवेश

मत्ती २१: १-१७

फरीसियों के साथ संघर्ष

मत्ती २१: १८-२७

दो दृष्टान्त

मत्ती २१: २८-४६

महा-पर्व

मत्ती २२: १-१४

रोम के लिए कर

मत्ती २२: १५-२२

पुनरुत्थान

मत्ती २२: २३-३३

सब से बड़ी आज्ञा

मत्ती २२: ३४-४६

फरीसियों पर न्याय

मत्ती २३: १-१५

फरीसियों पर न्याय

मत्ती २३: १६-३९

१०

आनेवाला सताव

मत्ती २४: १-५१

११

दस कुंवारियाँ

मत्ती २५: १-१३

१२

तीन सौंपे गए नौकर

मत्ती २५: १४-३०

१३

भेड़ और बकरियाँ

मत्ती २५: ३१-४६

१४

बेथनी में अभिषेक किया गया

मत्ती २६: १-१६

१५

अंतिम भोज

मत्ती २६: १७-३०

१६

बगीचा और प्रार्थना

मत्ती २६: ३१-४६

१७

प्रभु यीशु का पकड़वाया जाना

मत्ती २६: ४७-५६

१८

प्रमुख याजक, और पतरस द्वारा प्रभु यीशु का इनकार

मत्ती २६: ५७-७५

१९

यहूदा इस्करियोती की आत्महत्या

मत्ती २७: १-१०

२०

पिलातुस

मत्ती २७: ११-२६

२१

क्रूस पर चढ़ाया जाना

मत्ती २७: २७-४४

२२

मृत्यु और दफन

मत्ती २७: ४५-६६

२३

स्त्रियों द्वारा देखा जाना

मत्ती २८: १-१५

२४

महान आदेश

मत्ती २८: १६-२०